Women’s Day Poem in Hindi – Mahila Diwas Par Kavita

सबसे पहले आप सभी को Happy International Women’s Day – आप सभी को अंतरास्ट्रीय महिला दिवस की ढेर सारी सुभकामनाये, आज हम Mahila Diwas Par Kavita को पढ़ेंगे लेकिन  सबसे पहले हम जानते है कि महिला दिवस क्यो मनाया जाता है ?

क्या आप जानते है, 20वी सदी में महिलाओं को बहुत सारी अधिकार ही नही था, जैसे वो कही पे अपने मन मुताबिक काम नही कर सकती थी, अगर पे काम भी करती थी तो ,उनको ज्यादा टाइम तक काम करना पड़ता था,

और उन्हें वेतन भी कम मिलता था और यहां तक उन्हें वोट डालने तक का अधिकार नही था, मतलब वो अपने मन मुताबिक लीडर नही चुन सकती थी, धीरे-धीरे कुछ साहसी महिलाओ ने अपना अधिकार मांगा,

उसके लिए लड़ा तब जाके उन्हें उनका अधिकार मिला, हम आज जैसा जीवन जीते है, हमे लगता है ये तो बहुत पहले से ही होगा, लेकिन ऐसा नही है, इसके पीछे बहुत जागरूकता , बहुत लड़ाई, और बहुत क्रांति छिपा है।

21वी सदी की महिला अब और ज्यादा जागरूक हो चुकी है, आज के युग की नारी लगभग सभी क्षेत्रों में अपना स्थान बना चुकी है।


महिलाएं देश समाज एवं परिवार का मुख्य आधार होती है, वे नव युग का निर्माण करती है, और अपने समाज को सभ्य बनाने के साथ- साथ देश के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है ।


लेकिन देश के किसी कोने में अभी भी महिलाओं को पुरुष से कम आका जाता है, आज भी उन्हें खुद फैसले लेने के लिए अनुमति नही है, और उनके फैसले उनके पिता, भाई और पति द्वारा लिए जाते है,

आज के दिन 8 मार्च को वही महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करने के लिए, उनका आत्मविश्वास और मनोबल बढ़ाने के लिए पूरी दुनिया मे अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पूरे खुशी औऱ उल्लास के साथ मनाया जाता है।

आईये एक नारी के महत्व को समझने और उसका आत्मविश्वास बढाने के लिए एक कविता पढ़ते है।


हाँ वो नारी है।

हर गम छुपा के, मुस्कराना जानती है।


हाँ वो नारी है, – 2
जो हर गम छुपा के, मुस्कराना जानती है।

कभी पापा की परी,
तो कभी राजा की रानी बन जाती है।
कभी प्रियसी,
तो कभी माँ बन जाती है,
हाँ एक फूल की तरह,
अपनी सारी खुशी,
दुसरो पर लुटाना जानती हैं।

हाँ वो नारी है,
हर गम छुपा के, मुस्कराना जानती है।

उसके खुद के माँ-बाप,
उसे परायी धन समझते है,
ससुराल में,
दूसरे के घर से आयी है,
ऐसा उसे बताते है।
इन सारे,
चुभते हुए शब्दों को समेट कर,
हर परिस्थिति में खुद को ,
ढालना जानती है

हाँ वो नारी है,
हर गम छुपा के, मुस्कराना जानती है।

दिल मे हिम्मत रखकर,
खुद को नारी चुनती है,
जीवन के कष्ट भरे,
पत्थर को तोड़,
खुद अपनी राह बुनती है।
खुद भूखी हो, फिर भी -2
दुसरो का पेट,
वो भरना जानती है।

अजी साहब !

वो नारी है,
हर गम छुपा के, मुस्कराना जानती है।

यदि आप कुछ दे सकते हो, – 2
तो उसके कदमो का साथ दो –
उसके हाथों में अपना हाथ दो।

उसे बार-बार तहजीब सिखाने की,
चाहत ना करो। -2
उसकी उड़ान को रोकने की
कोशिश ना करो,

उसके लिए,
लक्ष्मण रेखा,
मत खींचो
वो भी ,हां जी
वो भी
अपने पंखो को पसारना,
चाहती है,

हाँ वो नारी है,
जो हर गम छुपा के, मुस्कराना जानती है।

उसके सपनो का गला मत घोटो,
पूछो उससे ,
देखो उसकी आँखों मे।
उसके भी सपने है,
उसके भी पंख है।

अपने साहस के पँखो से,
वो भी,
अजी वो भी।
आसमाँ के उचाईयो को,
छूना चाहती है,

अजी साहब

वो नारी है,
हर गम छुपा के , मुस्कराना जानती है।


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धन्यवाद !!!

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